देश मे अलग-अलग हिस्सो मे जो विरोध प्रदर्शन हो रहे है उनमे विरोधिओ को पिडिता से कुछ खास हमदर्दी नहि है ना हि तो वो लोग खरिदे हुए है, बस परेशान है, उनकि परेशानिया इस प्रकार है
-एक तो कोंग्रेस कि सरकार से ,खास करके उनके बडे बडे नेताओ को तो ठिक से बोलना भि नहि आता
-बेकारी,महेंगाई,....जो इसि सरकार कि देन है।
कुछ सपने भि उनको विरोध करने पर मजबुर करते है, जैसे कि-
-जैसे केजरिवाल और अन्ना प्रसिध्ध हो गये वैसे हि हम भि हो जाएंगे।
-अगर किसि फिल्म वालो ने टि वि पर देख लिया तो शायद एक्टिंग का मौका मिल जाये।
कुछ भि हो एक बात तय है कि कोंग्रेस 2014 मे बहोत बुरी तरह से हारेगी। क्योकि ये विरोध अंत मे तो कोंग्रेस का विरोध है।
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