"भ्रष्टाचार रोकने के लिये सरकारि नौकरि मे वेतन खानगि क्षेत्र कि तरह
देना चाहिए।जो अधिकारि जितना काम करे , उसे उतना वेतन ।
सरकारि काम एक पध्धत्ति से करना चाहिए:-
समज लिजिए कि कोइ एक जनता का काम है ,तो सबसे पहले वो काम
जहा होने वाला हो वहा के अनुभवि एवम शिक्षित लोग मिल कर तय करे
कि इस काम मे कितना खर्च होगा?जो संख्या तय कि जाये वहि उस काम के लिये अपरिवर्तित बजेट होगा।
बाद मे उस क्षेत्र के सरकारि अधिकारि को उसि बजेट मे वो काम
करना पडेगा।(उस बजेट मे अधिकारि के वेतन को नहि गिना जायेगा)
इस तरह से नेता को कोइ भ्रष्टाचार करने का मौका नहि मिलेगा।
और काम पुर्ण हो जाने पर वहि क्षेत्र कि जनता काम के प्रति अपनि राय
देंगि। काम कि गुणवत्ता ,खत्म होने मे लगे समय,पैसे के उपयोग,,,,,,बिगैरे के आधार पर उस अधिकारि को वेतन देना चाहिए।(इस तरह से
अधिकारि कि 'साइड' कमाइ उसकि मुख्य कमाइ बन जाएगि और सरकार
पर से उनके इतने बडे वेतन का बोज उतर जाएगा,और
अधिकारि भि भ्रष्टाचार नहि कर पाएंगे)
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